यह कहानी बेलवा गांव के एक किशोर अर्जुन की है, जो अंधविश्वास के खिलाफ अकेले खड़ा होता है। काली माई की आड़ में हो रही नरबलि की परंपरा को वो अपने साहस, बुद्धि और सच्चाई से उजागर करता है। डर और आस्था के बीच झूलते गांव में अर्जुन एक नई सोच की लौ जलाता है।