मैं जुड़ा हूं तूझे रूह की तरह
तू जुड़ी है मुझमें मेरी सांस की तरह
मेरी मोहब्बत नहीं है खुदगर्ज की तरह
बस इंतजार है मेरा मां पार्वती के लिए
मेरे महादेव की तरह ..!
मैं तुझे हासिल नहीं तेरी मोहब्बत चाहता हूं
तेरा जिस्म नहीं रूह को महसूस करना चाहता हूं
यूं तो कई हैं दुनियां में आशिक
पर इस दुनियां में नहीं हैं
मेरे महबूब की मोहबब्त की तरह ..!