मोहब्बत के रंग
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मोहब्बत के रंग
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मोहब्बत के रंग खुद ही चढ़ जाता जब महबूब पास होता है किसी को कहने की जरूरत नहीं पढ़ती बस उसका नशा ही अलग होता है....
: malwin
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