वीरांगना: जिजाऊ की ज्वाला
वो रानी नहीं थी, लेकिन राजा उसी की गोद से निकला।उसने युद्ध नहीं लड़े, लेकिन हर युद्ध की नींव उसी ने रखी।उसने सिंहासन पर नहीं बैठा, पर सिंहासन उसी के आँचल में पला।
यह कहानी है उस माँ की,जिसने केवल पुत्र नहीं, स्वराज्य को जन्म दिया।जब बीजापुर और मुगलों के साए में मराठा पहचान बुझ रही थी,तब एक स्त्री ने अपने गर्भ में एक क्रांति पाल ली।
वह माँ जिसने शिवाजी महाराज को सिर्फ राजा नहीं,
धर्म, नीति और न्याय का प्रतीक बनाया।
📖 "वीरांगना – जिजाऊ की ज्वाला"
एक ऐसी कहानी, जो साबित करेगी कि
इतिहास तलवारों से नहीं, माँओं के आँचल से बनता है।
पढ़िए…
उस स्त्री की कहानी,
जिसने मराठों को मराठा बनाया।
🚩 जय भवानी, जय शिवाजी!
🙏 जय जिजाऊ!