स्वैच्छिक( आइना)
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स्वैच्छिक( आइना)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
आइना कुछ ऐसा है औरों के ना जैसे है जैसे हो तुम , वैसे तुम दिखे तुम्हारे भाव क्या है यह खुद ही पहचान लेते है….
: malwin
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