अपना पराया
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अपना पराया
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अब न शिकवा किसी से, न कोई दुआ बाकी, जो भी है, जैसा है — उतना ही काफी। "अपने-पराए" की उलझन से अब मैं बाहर आया, सिर्फ अपने आप को ही सबसे ज़्यादा पाया।
लेखक : Erica
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