अपने पराए
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अपने पराए
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अफसोस मुझे इस बात का नहीं है , कि मुझे आप जैसा शख्स मिला है , वो शख्स जो मेरी आंखों में देखकर , मेरे हालातों को समझ लेता था , वो आजकल नजरें चुराने लगा है , वो कभी अपना सा लगता था अब ,
लेखक : Mahima
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