आसमान छूना चाहती हु....
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आसमान छूना चाहती हु....
कविता
अब नहीं लड़ना मुझे... में खुल कर जिना चाहती हु.... दुनिया की इम्तहान से दूर.... ऊंचाई को छूना चाहती हु....
लेखक : priya
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