निर्भय होकर चल पड़ा हूं मैं
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निर्भय होकर चल पड़ा हूं मैं
कविता
कविता
निर्भय होकर चल पड़ा हूं,अब भय नहीं है किसी भी तरह का अपने लक्ष्य को हासिल करने चले जा रहा हूं। कितने आएं रोकने कितनों ने बोला नहीं होगा तुमसे। किन्तु अटल हूं अब मैं प्राप्त कर के ही रहूंगा लक्ष्य अपना।
: Shekhar Abhash
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