ना होगा मुकम्मल अपना मिलना

client-img

ना होगा मुकम्मल अपना मिलना


यह कविता अधूरी मोहब्बत की भावनाओं को बयां करती है, जहां प्रेमिका अपने प्रेमी के शहर लौटने की कल्पना करती है। वो जानती है कि अगर उसने अपने प्रेमी को देख लिया तो और खुद को सम्भल नहीं पाएगी, और उनका मिलन ये दुनिया बर्दाश्त नहीं करेगी तो दूर रहना ही बेहतर है।
: dil_seee_shayriii

24

Views

5

Ratings

1 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप