मिलन की आस–विठोबा तक की वारी

client-img

मिलन की आस–विठोबा तक की वारी


जब दिल में सिर्फ़ एक ही नाम हो, जब पाँव छालों से भरे हों, पर मन में चाँदनी हो, जब घर-बार, सुख-सुविधा सब पीछे छूट जाए… तो समझो कोई वारकरी निकल पड़ा है — अपने विठ्ठल से मिलने। इसी मिलन की आस में जन्मी है ये कविता...
: Slient girl

25

Views

5

Ratings

7 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप