शादी की सात फेरो के साथ सुरभि की जिंदगी मे जैसे अंधेरा छा गया उसे अपने डॉक्टर बनने का सपना टूटता नजर आ रहा था वो विराज के बारे मे सिर्फ एक बात जानती थी कि वो शहर का सबसे बड़ा क्रिमिनल लॉयर है जिसने दो दिन पहले ही सुरभि की आँखों के सामने केस जितने के लिए एक इंसान की बड़ी बेरहमी से जान लेली लेकिन उस रात के पहर मे विराज का दिल सुरभि की मासूमियत और उसकी सुंदरता पर आ गया और अगले ही दिन उसने सुरभि को ढूढ़ने के लिए पुरा शहर छान मारा। जिसके बारे मे उसे दो घंटों कर अंदर ही पता चल गया और वो सीधा सुरभि का हाथ मागने उसके घर आ पहोचा।सुरभि इस शादी के लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी लेकिन विराज की एक धमकी ने उसकी पुरी लाइफ को हिला दिया.."अगर तुमने शादी करने से इंकार किया तो मै तुम्हारे पापा का छोटा सा बिजनेस पुरी तरह बर्बाद कर दूंगा और एक झूठे केस मे उन्हे जेल की सलाखो के पीछे पहोचा दूंगा"!!! सुरभि अपनी सोच मे डूबी ये सब याद कर रही थी तभी उसके कानो मे पंडित जी की आवाज़ गुजी...."विवाह संपन्न हुआ आज से वर और वधु पति पत्नी है"!!! सुरभि के कानो मे ये शब्द ग़ुजे और उसके लिए सब कुछ बदल गया।।।