एक याद बनकर
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एक याद बनकर
कविता
कविता
अब सब कुछ एक याद बनकर रह गई है , कभी उन लम्हों को जिया करते थे , आज उन्हें याद करके मुस्कुराते हैं , कभी सोचा नहीं था ..... ,
लेखक : Mahima
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