दिखावा
Added Successfully to library!
दिखावा
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये "दिखावा" उसका सच बन गया, भीतर का इंसान कहीं गुम सा रह गया। अब अगर पूछो, तो बस इतना कहेगा — "सब ठीक है…" और फिर चुप रह जाएगा।
लेखक : Erica
Add To Library
22
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप