दिखावा
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दिखावा
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये "दिखावा" उसका सच बन गया, भीतर का इंसान कहीं गुम सा रह गया। अब अगर पूछो, तो बस इतना कहेगा — "सब ठीक है…" और फिर चुप रह जाएगा।
: Erica
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