मैं नारी हूँ
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मैं नारी हूँ
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मैं नारी हूं, उड़ान भर रही हूं खुले आसमान में साँस ले रही हूँ जंजीरों को उखाड़ रही हूं अपनी जीत का झंडा लहरा रही हूँ !!
: malwin
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