अपने पिता की लाडली

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अपने पिता की लाडली


'पिता' ये शब्द कितना गहरा होता है ना एक बेटी के जीवन में।पापा के होते बेटी कभी किसी चीज के लिए नहीं तरसती।पापा कभी नहीं पूछते वे पैसे देने से पहले कि तुम इसका क्या करोगी।लेकिन पापा के जाते ही हर ईशान..हर इंसान उसकी बेटी से अपना मुँह मोर लेता है..क्यों?क्या पापा के बाद उसकी बातों को समझने वाला अब कोई नहीं है।जिसके साथ उसने साथ रहने की कसम खाई, क्या वो भी उसकी फिक्र नहीं करता। लाई हूं एक नई कहानी..जो जिंदगी के सच से जुड़ी हुई है।उम्मीद करती हूं इस छोटी सी बेटी को भी प्यार मिले।
: Choti si author

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