मै एक लड़की हूं
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मै एक लड़की हूं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अपने ख्वाहिशों को अपने अंदर समेटकर रखना पड़ता है , खुशी हो चाहे कितने भी ग़म में हो , आंखों में भले ही आंसू क्यों ना हो फिर भी खुशी का बहाना बना कर हंसना पड़ता है , कैसे भूल जाऊं मैं एक लड़की हूं ,
लेखक : Mahima
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