मीठे बोल
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मीठे बोल
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
मीठी बोल अब नहीं भाती है मन को, सच की चाह है अब हर जन को। नेता बनो, तो सेवा में दिखे बोल, वरना बंद रखो ये झूठे मीठे मोल।
लेखक : Erica
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