आज की सुबह एक अजीब सी लहर के साथ शुरू हुई , अचानक से मोबाइल का रिंग बजने लगा , उस मोबाइल की घंटी मुझे बेचैन कर देती है , ऐसा सोचने पर मजबूर कर देता है जैसे दूसरी तरफ से आने वाली आवाज किसी अनहोनी के होने की आशंका जता रही हो , मन बेचैन सा हो उठता है और एक घबराहट सी महसूस होती है ।
मै आरोही वर्मा हूं और ये मेरी कहानी है , आखिर मैं क्यों अपने ही लोगों के साजिश का शिकार हुई हूं , मेरी चीखे क्यों किसी के दिल को नहीं पिघलाती है , मेरे साथ हुए विश्वासघात का जिम्मेदार कौन है , मै हूं या फिर कोई और ।