मेरी कल्पनाएं
Added Successfully to library!
मेरी कल्पनाएं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अब ना कोई सपना, ना कोई चाह है, श्याम की भक्ति ही मेरी राह है। मीरा की तरह उसे ही दिल में बसाया है, "मेरी कल्पना" को श्याम ने सच्चा बनाया है।
लेखक : Erica
Add To Library
22
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप