सौतेली मां
Added Successfully to library!
सौतेली मां
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
दिल झकझोर कर रख देती हैं , जब ये समाज मुझे सौतेली मां कहती है , माना कि जन्म नहीं दिया मैने तुझे , पर लाड़ अपने बच्चे की तरह लगाया है , मुझे आज भी याद है वो दिन , जब दुल्हन के लिबास में दरवाजे पर खड़ी मैं , तुम्हारा मासूम सा चेहरा नजर आया ,
लेखक : Mahima
Add To Library
24
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप