यह कविता "तेरी नाराज़गी" एक टूटे दिल की पुकार है, जो अपने रूठे हुए साथी को मनाने की कोशिश कर रहा है।
हर पंक्ति में अफ़सोस, प्यार और उम्मीद की गहराई छिपी है।
ये कविता उन सभी के जज़्बात बयां करती है जिन्होंने कभी अपनों की ख़ामोशी में दर्द महसूस किया है।