गाव का बाजार
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गाव का बाजार
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
औरतें सजी, हँसी से हारी, ओढ़नी रंग-बिरंगी सारी। ठिठोली करतीं, भाव बतातीं, चूड़ियाँ खनकतीं, सौदे कर आतीं।
: rani
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