सुख–दुख
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सुख–दुख
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
सुख–दुख जीवन के दो अनमोल रंग हैं, जो साथ चलते हैं, सिखाते हैं जीने की तर्ज़। इस कविता में उन्हीं जज़्बातों को शब्दों में पिरोया गया है।
लेखक : विजय सांगा
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