बिखरे हुए अरमान
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बिखरे हुए अरमान
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
टूटे हुए दिल , भींगी हुई पलकों से बिखरे हुए अरमानों के साथ , लाल जोड़े में सजी हुई वो दुल्हन , होठों पर झूठी मुस्कान लिए हुए , अपने आशियाने को छोड़ , किसी और के घर - संसार को बसाने जा रही थी , जो दिल में था , वो दिल में ही रह गया ,
: Mahima
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