बिखरते अरमान
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बिखरते अरमान
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
अरमान थे कुछ रंग भरे, सपनों की चादर संग सवेरे। उम्मीदों की डोर थामे हुए, चल दिए थे राहें नए सिरे।
: Writer Dev
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