निशब्द प्रेम
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निशब्द प्रेम
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
निशब्द प्रेम वहां से शुरू होता है जहां बोलने की जरूरत खत्म हो जाती है, सिर्फ समझ जाना ही अस्तित्व में रहता है।
: तृप्ति सिंह
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