याद आव

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याद आव


यह कविता बीते बचपन, अपनों के साथ बिताए मधुर पलों और अब खो चुके सुकून की भावनात्मक याद दिलाती है। कवि माँ की गोद, दादी की लोरी, बाबा की साइकिल, मिट्टी में खेलना, बारिश में भीगना और छत पर तारे गिनने जैसी मासूमियत भरी यादों को बहुत ही सादगी और दर्द के साथ याद करता है। वह कहता है कि आज सब कुछ होते हुए भी वो सच्चा सुकून, अपनापन और बचपन की मिठास नहीं है। हर हँसी में अब कोई कमी सी लगती है। कविता इस बात को उजागर करती है कि बीते पल लौटकर नहीं आते, लेकिन उनकी यादें हमेशा दिल में एक खालीपन छोड़ जाती हैं।
: Wishcard Sangeeta

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