मेरा बचपन का घर

client-img

मेरा बचपन का घर


यह कविता बचपन के उस प्यारे घर की स्मृतियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करती है जहाँ हर कोना मासूमियत, सुकून और अपनापन से भरा था। कवि उस मिट्टी की खुशबू, आँगन में खेल, माँ की रसोई, दादी की कहानियाँ और बारिश में नाचने जैसे खूबसूरत पलों को याद करता है। अब जबकि वह घर पीछे छूट गया है और कवि शहर की दौड़ में उलझ गया है, उसे अपने पुराने दिन और घर की सादगी बहुत याद आती है। कविता इस भावना को जगाती है कि बचपन का घर केवल ईंटों का ढाँचा नहीं, बल्कि जीवन की सबसे कीमती और जन्नत जैसी जगह होती है।

1

Views

5

Ratings

1 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप