मेरा बचपन का घर

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मेरा बचपन का घर


यह कविता बचपन के उस प्यारे घर की स्मृतियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करती है जहाँ हर कोना मासूमियत, सुकून और अपनापन से भरा था। कवि उस मिट्टी की खुशबू, आँगन में खेल, माँ की रसोई, दादी की कहानियाँ और बारिश में नाचने जैसे खूबसूरत पलों को याद करता है। अब जबकि वह घर पीछे छूट गया है और कवि शहर की दौड़ में उलझ गया है, उसे अपने पुराने दिन और घर की सादगी बहुत याद आती है। कविता इस भावना को जगाती है कि बचपन का घर केवल ईंटों का ढाँचा नहीं, बल्कि जीवन की सबसे कीमती और जन्नत जैसी जगह होती है।
: Wishcard Sangeeta

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