यह कविता उस क्षण का प्रतीक है जब क्रोध, करुणा से ऊपर उठता है
और नारी, केवल पीड़िता नहीं, परिवर्तन की अग्निशिखा बन जाती है।
मुख्य संदेश:
> "जब अन्याय पर सब मौन हो जाएं, तब एक नारी की ललकार से महाभारत भी जन्म ले सकता है।"
"द्रौपदी का क्रोध केवल व्यक्तिगत नहीं था, वह समस्त नारी जाति की चेतना बन गया।"