क्रोध
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क्रोध
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
क्षण भर का वह आवेग घना, सालों का रिश्ता तोड़े बिना सना। ना समझे यह मन की बात, क्रोध दे जाता गहरी घात।
: rani
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