क्रोध
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क्रोध
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
क्रोध – न वह दुश्मन है, न मित्र, बस एक अग्नि की लपट है। जो संभाले, तो ऊर्जा बन जाए, जो बिखरे, तो सर्वनाश करे।
: Writer Dev
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