ऑफिस जाना है
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ऑफिस जाना है
दैनिक प्रतियोगिता
रोजाना प्रकाशित
यह कविता जीवन के उस मोड को दर्शाती है जब इंसान बचपन की मौज मस्ती और स्कूल के दिन पीछे छोड़कर वयस्क जीवन की जिम्मेदारियों की ओर बढ़ता है
लेखक : dil_seee_shayriii
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