प्यासी आत्मा

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प्यासी आत्मा


यह कहानी एक पुराने वीरान बंगलो और उसमें भटकती आत्मा की है, जिसे प्रेम की अधूरी प्यास ने बाँध रखा है। शहर से आए एक शिक्षक अजय को गांव में यह बंगलो रहने के लिए दिया जाता है। गांववाले उसे चेताते हैं कि वह बंगलो अभिशप्त है, लेकिन अजय उनकी बातों को अंधविश्वास मानता है। जल्द ही उसे रातों को एक स्त्री की सिसकियाँ सुनाई देने लगती हैं। गांव की एक वृद्धा उसे बताती है कि वहां कभी ठाकुर रघुनाथ सिंह की रखैल राधा रहती थी, जो एक शिक्षक देवदत्त से प्रेम करने लगी थी। ठाकुर ने दोनों को मारकर हवेली के कुएं में फेंक दिया था। राधा की आत्मा अब भी प्रेम की प्यास लिए हवेली में भटक रही है। अजय को धीरे-धीरे राधा की उपस्थिति महसूस होने लगती है। वह आत्मा से संवाद करता है और उसकी तड़प को समझता है। अंततः वह हवेली के कुएं से दोनों प्रेमियों के कंकाल निकालकर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार करता है। आत्मा को शांति मिल जाती है और हवेली की रहस्यमय घटनाएं बंद हो जाती हैं। राधा की आत्मा अंतिम बार अजय को धन्यवाद देती है — क्योंकि उसने न सिर्फ उसे समझा, बल्कि उसकी अधूरी प्रेमकथा को भी पूर्णता दी।

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