बचपना

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बचपना


यह कविता बचपन की मासूमियत, निश्चिंतता और खुशियों से भरी दुनिया का चित्रण करती है। इसमें बताया गया है कि कैसे बचपन में छोटी-छोटी चीज़ों में बड़ी खुशियाँ होती थीं — मिट्टी में खेलना, परियों की कहानियाँ सुनना, खिलौनों की शादियाँ रचाना और हर गलती पर माफ़ी मिल जाना। कविता यह भी दर्शाती है कि बचपन में न कोई चिंता होती थी, न डर, बस हर दिन एक नया त्योहार लगता था। अंत में, यह कविता उस बीते बचपन की एक बार फिर से वापसी की प्यारी ख्वाहिश व्यक्त करती है।

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