दुल्हन

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दुल्हन


यह कविता एक नवविवाहित दुल्हन की भावनाओं और उसकी नई ज़िंदगी की शुरुआत को दर्शाती है। कविता में बताया गया है कि दुल्हन सज-धज कर बैठी है, लेकिन उसके दिल में एक अनकहा डर और अपने मायके से बिछड़ने का दुःख भी छिपा है। मेंहदी, गहने और लाल जोड़ा उसकी सुंदरता को बढ़ा रहे हैं, लेकिन अंदर से वह भावुक है। वह एक नए जीवन, नए रिश्तों और ज़िम्मेदारियों की ओर बढ़ रही है। यह कविता दुल्हन के रूप में एक स्त्री की सुंदरता, संकोच, त्याग और साहस को मार्मिक रूप से व्यक्त करती है।

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