बुरे दिन

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बुरे दिन


यह कविता जीवन के उन कठिन पलों को दर्शाती है जब हर ओर निराशा और अंधकार छाया होता है। बुरे दिनों में इंसान अकेला महसूस करता है, अपने भी अजनबी लगते हैं, और जीवन का हर रंग फीका पड़ जाता है। न दिन में सुकून होता है, न रातों में चैन। तन्हाई और दर्द ही साथ नजर आते हैं। कविता में यह भी संदेश छिपा है कि ये बुरे दिन स्थायी नहीं होते। जैसे अंधेरे के बाद उजाला आता है, वैसे ही समय बदलता है और अच्छे दिन फिर लौटते हैं। यह कविता दुःख की गहराई को छूते हुए अंत में आशा की एक किरण भी दिखाती है।
: Wishcard Sangeeta

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