नारी

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नारी


यह कविता नारी को शक्ति, प्रेम, सहनशीलता और संघर्ष का प्रतीक मानती है। वह जननी भी है और रक्षक भी। कभी कोमल सी सीता, तो कभी तांडव करती काली बन जाती है। नारी के बिना सृष्टि अधूरी है। कविता नारी के हर रूप का सम्मान करने और उसे बराबरी का अधिकार देने का संदेश देती है।

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