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ज़िंदगी कैसी है पहेली?
एक कविता-संग्रह
लेखिका: गरिमा त्रिपाठी
समर्पण:
यह संग्रह समर्पित है
उन सभी लड़कियों को
जो भीड़ में अकेली होती हैं,
जो आँसुओं से मुस्कुराहट बुनती हैं,
जो हर पहेली को जीवन का हिस्सा मान
फिर भी हर सुबह उठकर लड़ती हैं।
प्रस्तावना
"ज़िंदगी कैसी है पहेली?" सिर्फ़ एक प्रश्न नहीं,
बल्कि एक भावना है ।
हर उस स्त्री की, जो खामोशियों में भी बोलती है,
जो दरकते रिश्तों के बीच
अपने सपनों की थाली संभालती है।
यह संग्रह उनकी उन यात्राओं की गाथा है,
जहाँ संघर्ष है, संदेह है, पर अंततः
आत्मा की उजास और मुस्कुराहट की जीत है।
हर अध्याय, एक पड़ाव है,
और हर छंद एक साँस की तरह सजीव।
आप पढ़ेंगे .. एक लड़की के भीतर की लड़की को,
जो कभी टूटी, कभी बिखरी,
पर अंत में ....
खुद को जान गई।