अब मौन नही
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अब मौन नही
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
क्योंकि अब… "नारी चुप नहीं रहेगी। नारी अब खुद को गढ़ेगी। जहाँ अन्याय होगा, वहाँ क्रांति की मशाल बन अब यही नारी जलेगी।
लेखक : तृप्ति सिंह
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