सिर्फ तुम ही हो

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सिर्फ तुम ही हो


यह कविता सच्चे प्रेम और गहरे जुड़ाव को व्यक्त करती है। कवि कहता है कि उसे दुनिया की कोई और चीज़ नहीं चाहिए — उसका सारा सुख, सुकून, सवालों के जवाब और जीवन की असल खुशी सिर्फ एक ही इंसान से जुड़ी है। चाहे वक्त बदल जाए या हालात, उस एक इंसान की यादें, एहसास और उपस्थिति उसकी ज़िंदगी की सबसे खास चीज़ हैं। कविता में प्रेम को शब्दों से परे, एक अनुभव, एक सुकून और एक पहचान के रूप में दिखाया गया है।

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