चाहत का सफर - नफरत से मोहब्बत तक
कहते है इश्क की कहानी कभी खत्म नहीं होती है , चाहे ये जितने भी दर्द दे , आंसू दे लेकिन इसकी अहमियत कम नहीं होती है , ईश्क की दास्तां बयां करने के लिए जुबां ही काफी नहीं होती है बल्कि दिल में छुपे दर्द आंखों से बहते हुए आंसुओ की धारा बन जाती हैं , ईश्क तो मैने भी किया था और तुमने भी तो फिर हम मिले क्यों नहीं , मेरी किस्मत में तुमसे मिलना तो था लेकिन तुम्हारा साथ कुछ ही पलों का था और मै अपने मंजिल पर पहुंच कर भी अकेली हूं मैं , मैने तुमसे जितने सिद्दत से इश्क किया उससे कहीं ज्यादा अब मैं नफरत करती हूं ।
वेद राठौर एक जाना माना बिजनेस टायकून , जो सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि दुनिया पर राज करने वाला , एक ऐसा शख्स जिसके दिल में ना दया है और न ही कोई भावना , बेरहम ,बेहद ही दिलजला और गुस्से वाला इंसान जिसे सिर्फ खूबसूरत लड़कियां पसंद तो है लेकिन सिर्फ उसके बिस्तर पर , जिनके साथ वो रातें रंगीन कर सके ...
खूबसूरत दिखना किसे नहीं पसंद पर क्या हो जब खूबसूरती ही अभिशाप बन जाए ..... ऐसा ही हुआ आराधना अवस्थी के साथ .....
अपने शौक को पूरा करने की जिद में वेद टकराता है खूबसूरती की मिशाल , मासूम सी , बेहद ही कोमल मन की आराधना अवस्थी से जिसकी खूबसूरती को देखकर पागल हुआ वेद उसके साथ एक रात गुजारने की कोई भी कीमत देने को तैयार था लेकिन आराधना ने वेद के इस ऑफर को न सिर्फ ठुकराया बल्कि उसे बेइज्जत भी किया , अपनी इसी बेइज्जती का बदला लेने के लिए वेद बर्बाद करना चाहता है आराधना की जिंदगी ....... ।"