हार नहीं मानूंगा
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हार नहीं मानूंगा
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
थककर बैठ जाऊं, ये मेरी फितरत नहीं, संघर्षों से डर जाऊं, इतनी भी हिम्मत नहीं। आंधियाँ चाहे जितनी तेज़ चलें, जुगनू बन अंधेरों में भी जलें।
: rani
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