"मेरा मन" कविता में कवि ने अपने मन को अलग-अलग रूपों में दर्शाया है—कभी खाली पन्ना, कभी भटका बादल, कभी दीपक, तो कभी मासूम बच्चा। यह मन खुशियों और दुखों के बीच झूलता है, सरलता से दुनिया को देखता है और हर परिस्थिति में खुद को फिर से जोड़ लेता है। अंत में, कवि यह स्वीकार करता है कि यह मन जैसा भी है, वह उसका अपना है और उसी से जीवन चलता है।