अब वो एहसास नहीं
Added Successfully to library!
अब वो एहसास नहीं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कितना कुछ कहना है तुमसे , पर अब वो एहसास नहीं, तेरे कंधे पर सर रखे जमाना हुआ , अब वो सुकून की तलाश नहीं , कभी तेरा साथ अच्छा लगता है , दिल खोलकर जीना चाहता था , तुमसे मिलकर खिल उठती थी मैं , अब तुम्हे देखकर ही दिल को तसल्ली देती हूं ,
: Mahima
Add To Library
18
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप