मां (स्वैच्छिक)
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मां (स्वैच्छिक)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तू हँसे तो फूल खिल जाएँ, तेरे बिना सब सूना लगता है। तेरे स्पर्श में जादू ऐसा, हर दर्द चुपचाप सिमटता है।
: Writer Dev
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