मेरा क्या कसूर
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मेरा क्या कसूर
कविता
कविता
मैं तो बस प्यार ही बाँटती रही, हर दर्द में साथ निभाती रही। फिर भी क्यों बना दी गई कसूरवार, क्यों मिलती रही हर बार तिरस्कार?
: rani
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