मै नदी हूं

client-img

मै नदी हूं


यह कविता "मैं नदी हूं" एक नदी की आत्मकथा के रूप में रची गई है, जिसमें वह अपने जन्म से लेकर मानव समाज पर अपने प्रभाव तक की यात्रा को दर्शाती है। यह प्रकृति, सेवा, संघर्ष और चेतावनी का समन्वित चित्र प्रस्तुत करती है।

25

Views

5

Ratings

2 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप