मेरी कहानी

client-img

मेरी कहानी


सपने देखना और पूरा करना सबका अधिकार है पर कुछ औरतें सपने छोड़ अपने घर को सभांलना, सजाना चुनती है। इसका मतलब यह नहीं कि वह कुछ भी नहीं करती है। अगर वह घर न सभांले तो क्या वह घर, घर कहलाएगा? आज की कविता उन सभी गृहणियों को समर्पित है बड़ी सिद्दत से अपने घर को घर बनाती है। अगर कविता पंसद आए तो कृपया लाइक और कमेंट जरूर करें। 😊🙏
लेखक : Neha

19

Views

5

Ratings

2 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप